Awartan | आवर्तन (हिंदी)
'सूक्ष्म को स्थूल का सदैव अवलोकन करना चाहिए तथा सूक्ष्म की ओर अग्रेसर होने तक ही स्थूल का अस्तित्व रहे यह मूलमंत्र देता है हमारा भारतीय शास्त्रीय संगीत कैसे चलता है यह स्थूल सूक्ष्म का अंतःसंचार ? किन सिध्दांतोंसे खिलता है हिंदुस्तानी संगीत ? घराने की सीमा का जतन करें या तोड दें ? साथ किसे कहते हैं? और संगत का क्या मतलब है? संगीत ही अर्चना, वही साधना, उपासना भी, इस मानक से तबले की तपश्चर्या में लीन तालयोगीका संगीत के बारेमें गहन, चौगिर्द चिंतन आवर्तन
ISBN: 978-93-48736-07-9
- बाईंडिंग : कार्ड बाईंडिंग
- आकार : ५.५" X ८.५"
- पहिली आवृत्ती : एप्रिल २०२६
- मुखपृष्ठ : सागर नेने राजहंस क्रमांक :B-01-2026 (1236)